शुक्रवार, 18 नवंबर 2011

दिल के मरीजोँ के लिए लहसुन का तेल फायदेमंद

एक शोध के अनुसार लहसुन का तेल हार्ट पेशेँट के लिए बेहद फायदेमंद है। खास तौर पर हार्ट अटैक के बाद पेशेँट को ठीक रखने के लिए।लहसुन के तेल मेँ मौजूद डायलिल ट्राइ सल्फाइड नामक पदार्थ कार्डियक सर्जरी के दौरान हार्ट को मजबूती देता है। शोध के अनुसार डायलिल ट्राई सल्फाइड नामक पदार्थ हाइड्रोजन सल्फाइड के विकल्प के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता ...

रविवार, 6 नवंबर 2011

सियाटिका के दर्द को देँ ऐसे शिकस्त

सियाटिका नर्व (नाड़ी) शरीर की सबसे लंबी नर्व होती है। यह नर्व कमर की हड्डी से गुजरकर जांघ के पिछले भाग से होती हुई पैरोँ के पिछले हिस्से मेँ जाती है। जब दर्द इसके रास्ते से होकर गुजरता है, तब ही यह सियाटिका का दर्द कहलाता है। होलिस्टिक मेडिसिन के तहत इस मर्ज का स्थायी समाधान संभव है।लक्षण * कमर के निचले हिस्से मेँ दर्द के साथ जाँघ व टांग के पिछले हिस्से मेँ दर्द।* पैरोँ मेँ सुन्नपन के साथ मांसपेशियोँ मेँ कमजोरी का अनुभव।* पंजोँ मेँ सुन्नपन व झनझनाहट। बचाव * प्रतिदिन सामान्य व्यायाम करेँ।* वजन नियंत्रण मेँ रखेँ।* पौष्टिक आहार ग्रहण करेँ।* रीढ़ की हड्डी को चलने-फिरने और उठते-बैठते समय सीधा रखेँ।* भारी वजन न उठाएं। होलिस्टिक समाधान सामान्य रूप से...

शनिवार, 8 अक्टूबर 2011

तिमाही गर्भ निरोधक इंजैक्शन

प्रo तिमाही गर्भनिरोधकइंजैक्शन क्या है?उo तिमाही गर्भ निरोधकइंजैक्शन अनचाहे गर्भ कोरोकने का एक उपाय है। यहअनचाहे गर्भ को रोकने कीइच्छुक महिलाओँ के लिएएक सरल और सुरक्षित उपाय है। यह 99.796प्रतिशत प्रभावशाली है।प्रo यह सूई कहाँ लगाईजाती है?उo यह महिला के बांह याकूल्हे मेँ लगाई जाती है।प्रo यह गर्भ निरोधक इंजैक्शन कब लगवाया जासकता है?उo पहली सूई के बाद हर3 महिने मेँ एक सूई लगवाएं।यह इंजैक्शन हर 3 महिने मेँ लगवाना बहुत जरूरी है,पर यदि किसी कारण से इसे निर्धारित तारीख पर नलगपा पाएं तो उस तारीख से 2 हफ्ते पहले या 2 हफ्तेबाद भी लगवा सकती हैँ।यदि 2 हफ्ते से ज्यादा देरहो जाए तो अगली सूई लगवाने तक या तो यौनसंबंध न बनाएं अथवा यौनसंबंध मेँ सुरक्षित गर्भनिरोधक...

शुक्रवार, 7 अक्टूबर 2011

क्योँ होता है सिर दर्द

सिर दर्द एक आम बीमारीहै। आमतौर से 90 प्रतिशतव्यक्तियोँ मेँ एक बार सिरदर्द होता ही है। 40 प्रतिशतव्यक्तियोँ मेँ वर्ष मेँ एक बारबहुत तेज सिर दर्द होता है।*सिर दर्द के बहुत से कारणहैँ, गम्भीर रोगोँ के प्रति भीयह इशारा कर सकता है।*सिर दर्द का आम कारणटेँशन होता है जो आज केयुग मेँ आम बात है।*सिर दर्द के रोगी का रक्त-चाप अवश्य नाप लेना चाहिए क्योँकि बढ़ा हुआरक्तचाप इस लक्षण का एकआवश्यक कारण है।*बार-बार जुकाम वाले रोगी को जो सिर दर्दसाइनासाइटिस की वजह सेहोता है। जो सूर्य के बढ़ते-बढ़ते बढ़ता जाता है औरसूर्यास्त होते-होते घटने लगता है। आगे झुकने परयह दर्द बढ़ जाता है।*मस्तिष्क की झिल्लियोँ मेँसूजन(मेनिँगजाइटिस) सिरदर्द का एक प्रमुख कारण है।रोगी तेज रोशनी से...

बुधवार, 5 अक्टूबर 2011

डायबिटिज वाले क्या खायेँ

आहार मेँ कुछ food substance ऐसे होते हैँजिन्हेँ अवश्य शामिल करनाचाहिए जैसे- ओट्स, सोयाबीन, हरी चाय, जौँतथा ईसबगोल।ओट्स या ओटमील:-इसमेँ एक विशिष्ट प्रकार का फाइबर पाया जाता है जिसे वीटा ग्लूकोज कहते हैँ। यह घुलने वाला फाइबर होता है और शरीर को बुरे कोलेस्ट्रोल एलoडीoएलoसे लड़ने मेँ मदद करता है। सबसे बड़ी बात तो यह है कि यह केवल बुरे कोलेस्ट्रोल को हीकम करता है और अच्छाकोलेस्ट्रोल एचoडीoएलoशरीर मेँ बरकरार रहता है।जिससे शरीर मेँ एलoडीo एलo और एचoडीoएलoकोलेस्ट्रोल के बीच बेहतरअनुपात रहता है। सोयाबीन :- सोयाबीन शरीर को हाइपरकोले-स्ट्रोमिया से बचाता है औरशरीर मेँ बुरे कोलेस्ट्रोलएलoडीoएलo को घटाता है।हरी चाय :- कई शोधोँ सेयह सिद्व हुआ है कि कालीया हरी...

गुरुवार, 29 सितंबर 2011

रत्नोँ के लाभ

आजकल गली-चौराहे वचौपाटियोँ पर जगह-जगहरत्नोँ की दुकानेँ खुल गई हैँ।विक्रेता रत्न के बारे मेँ जानेँया ना जानेँ, पर इस फायदेमंद धंधे को अपनाने से पीछेनहीँ हटते। वे जानते हैँ कि आजकलरातोँ-रात लखपति बनने केसपने आदमी देखता है।रोगमुक्त जीवन जीनाचाहता है। फिर इन रत्नोँ की जानकारी चाशनीदारभाषा मेँ रूपान्तरित करखरीदार के समक्ष पेश करनेमात्र से लाभ ही लाभ है तोक्या बुरा है।आपको बता देँ कि कोई भीरत्न अच्छे जानकार से पूछे बगैर धारण न करेँ। बिनासोचे-समझे पहननेँ परसंभवतः आपको हानि हीहाथ लगेगी।आइए आपको रत्नोँ की संक्षिप्त जानकारी देँ :-1. माणिक्य :- यह सिँहराशि का रत्न है जो सूर्य केदोषोँ को दूर करता है।इसकेअलावा यह सिर, हृदय, पेटव नेत्रोँ पर प्रभाव डालता...

सोमवार, 26 सितंबर 2011

क्योँ आता है जल्दी बुढ़ापा?

आज भी मॉर्डन जीवन शैलीमेँ जल्दी बुढ़ापा आने कामतलब है कि शारीरिकऔर मानसिक तौर परजल्दी कमजोर हो जाना।दरअसल बढ़ती उम्र हमेँजीवन के आखिरी पड़ावबुढ़ापा या वृद्वावस्था तकपहुँचाता है। वृद्वावस्था वह अवस्थाहोती है जब शरीर की सुनने, देखने, बोलने, सूंघने, जीभ, त्वचा, मानसिक क्षमता काकाम करने की योग्यताक्षीण होने लगती है लेकिनमॉर्डन जमाने मेँ यहअवस्था जल्द ही इंसान कोअपने वश मेँ करने लगतीहै।जल्दी वृद्वावस्था आने केकारण :- > भागती-दौड़ती जीवन शैली, > गलत खाने की आदतेँ,> शराब व तंबाकू का सेवन।रोकथाम के उपाय:-> रोजमर्रा जीवन मेँ योगाव आयुर्वेद का उपयोग करना।> स्वादोँ 'मीठा, खट्टा, कड़वा, तीखा, नमकीन' कासंतुलित सेवन करना।> कैलोरी के सेवन व खपतमेँ...

शनिवार, 17 सितंबर 2011

सपनोँ मेँ भी महिलाओँ से भेदभाव

रात मेँ सोते समय सपनेदेखना एक आम बात है।हम सब कुछ हसीन सपनेदेखते हैँ लेकिन कभी-कभीसपने हमेँ अच्छा-खासा डराभी देते हैँ।विशेषज्ञोँ के दावे को सहीमाने तो सपनोँ की दुनियामेँ भी महिलाओँ के साथभेदभाव होता है। एक रिसर्च के मुताबिक पुरूषोँके मुकाबले महिलाओँ कोज्यादा डरावने सपनेदिखाई देते हैँ।शोधकर्ताओँ का कहना हैकि रात को सोते वक्त महिलाओँ को आने वालेसपने मेँ हार्मोन महत्वपूर्णभूमिका निभाता है। शोध से यह तथ्य सामने आयाहै कि सपने के विषय तयकरने मेँ महिलाओँ के हार्मोन चक्र की भूमिका होती है। माहवारी से पहलेमहिलाएं ज्यादा भावनात्मकऔर डरावने सपने देखती हैँमहावारी की वजह से शरीर के तापमान मेँ आया अंतर सपनो की जड़ है।शोधदल की प्रमुख डाँक्टरजेन्नी पार्कर का...

मंगलवार, 13 सितंबर 2011

जीभ से जाने अपने स्वास्थ्य के बारे मेँ

जब भी आप डाँक्टर केपास जाते हैँ, तो वह टाँर्चकी मदद से आपकी जीभजरूर चेक करता है। कुछलोगोँ को भले ही यहअजीब लगता हो, लेकिनसच्चाई यह है कि इस तरहसे बड़ी-बड़ी बीमारियाँ पकड़ मेँ आ जाती हैँ।दरअसल, जीभ मेँ होने वालेबदलाव कई बीमारियोँ को समय पर पकड़ने मेँ मददकरते हैँ। जाहिर है, इस तरह ये बीमारियाँ गंभीररूप लेने से बच जाती हैँ।छाले होना :- जीभ पर छोटे व दर्द करनेवाले छाले एक आमसमस्या है । इनकी वजहस्ट्रेस, टेँशन, और हाँर्मोनलबदलाव हो सकती है ।हालांकि ये किसी खासबीमारी के लक्षण नहीँ होते और कुछ ही दिनोँ मेँ ठीकहो जाते हैँ । वहीँ , कुछखास तरह के छाले बाँडी मेँएलर्जी रिएक्शन, वायरसइंफेक्शन और इम्यूनडिसऑर्डर की ओर इशाराकरतेँ हैँ और जीभ की एकसाइड पर दर्द करने...

मंगलवार, 6 सितंबर 2011

सिर के गंजेपन के लिए अनुभूत प्रयोग

दूब घास(Cynodondactylon) के पंचाग (फल, फूल, जड़, तना, पत्ती) तथाकनेर के पत्तोँ को पीस कर कपड़े मेँ रखकर रस निकालेँऔर सिर के गंजे स्थान पर लगायेँ तो सिर्फ 15 दिनोँ मेँही उस स्थान पर नये बालदिखाई देने शुरू हो जाते हैँ।तथा पूरे सिर मेँ तेल की तरह इस रस का प्रयोग करेँतब सफेद बाल काले होनेलगते हैँ ।-: MY OTHER BLOGS :- SANSAR(Ghazals) प्रेरक-विचार बचत और निवेश...

शनिवार, 3 सितंबर 2011

शादी के बाद बनती है अच्छी सेहत

हर किसी के जीवन में एक न एक दिन ऐसा पल आता है जब वह शादी के बंधन में बंधता है। हालांकि किसी के जीवन में ये पल जल्दी आता है, तो किसी के जीवन में देर में। आप शादी के बंधन में बंधने के बाद कई अच्छी बुरी परिस्थितियों से गुजरते हैं। शोधों से भी यह बात स्पष्ट हो चुकी है कि शादी का बंधन पुरूषों को तंदरूस्त‍ बनाता है और महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्‍य को बेहतर बनाता है। हालांकि देर से शादी करने में भी कोई बुराई नहीं। आइए जानें शादी से सेहत कैसे बनती है। > जाहिर सी बात है कि यदि कोई आपकी सही देखभाल और अतिरिक्त केयर करने वाला मिलेगा तो आप निश्चिततौर पर स्वस्थ होंगे। > शादी का बंधन ऐसा तोहफा है जिससे आपका साथी न सिर्फ आपको...

शुक्रवार, 19 अगस्त 2011

कैफीन सनस्क्रीन करेगा अब स्किन कैँसर और झुरियोँ से हिफाजत

अब स्किन कैँसर और चेहरे की झुरियोँ को बाय-बाय कहने का वक्त आ गया है । वैज्ञानिकोँ ने एक ऐसा सनस्क्रीन बनाने का दावा किया है जो स्किन कैँसर और चेहरे की झुरियोँ से हिफाजत करेगा । काँफी मेँ मौजूद कैफीन स्किन को बिना नुकसान पहुँचाए अल्ट्रा वायलेट किरणोँ से क्षतिग्रस्त कोशिकाओँ को मारने मेँ मददगार होता है । अब कैफीन को सनस्क्रीन लोशन बनाने मेँ इस्तेमाल किया जाएगा । अध्ययन के मुताबिक स्किन मेँ एटीआर नामका प्रोटीन पाया जाता है , जिसमेँ छेड़छाड़ कर कैफीन त्वचा की रक्षा करता है । -: MY OTHER BLOGS :- > SANSAR(Ghazals) > प्रेरक-विचार > बचत और निवेश ...

गुरुवार, 18 अगस्त 2011

लहसुन एक चमत्कारी औषधि

लहसुन एक दिव्य औषधि है । यह हाजमा ठीक करने के साथ ही गैस को दूर करता है। > लहसुन मेँ एंटीसेप्टिक और एंटीबायोटिक का गुण भी पाया जाता है। यह टीबी के कीटाणुओँ को नष्ट कर देता है। > दिल के लिए टाँनिक होने के साथ ही यह खराब कोलेस्ट्राल को कम करता है। > इसे पीसकर शहद के साथ खाने से नर्वस सिस्टम ठीक रहता है। > लहसुन का रस शहद के साथ मिलाकर खायेँ तो खाँसी दूर भाग जायेगी। > यदि नीँद न आये तो इसके दो या तीन जवे खाने से फायदा मिलेगा। > लहसुन दमा के इलाज मेँ काफी कारगर होता है। 50ml. दूध मेँ लहसुन के पाँच जवोँ को ऊबालकर सेवन करने से दमे की शुरूआती अवस्था मेँ अच्छा फायदा करता है। > यह आँतोँ से चिपके मल को भी बाहर निकाल देता है और कब्ज से मुक्ति दिलाता है। > यह जोड़ोँ के दर्द या गठिया मेँ रामबाण है तथा जोड़ोँ की सूजन को नष्ट करता है। > यह शरीर मेँ रक्त...

बुधवार, 17 अगस्त 2011

ग्वारपाठा(घृतकुमारी) पेट तथा स्किन के लिए रामबाण

ग्वारपाठा या घृतकुमारी(एलोवेरा) को 20gm. मात्रा मेँ लेकर 20ml. पानी के साथ मिक्सी मेँ जूस बनाकर रख लेँ। इसी तरह रोजाना ताजा जूस बनायेँ। सेवन मात्रा :- 20ml. सुबह खाली पेट और 20ml. रात को सोते समय। उपयोग :- आँतोँ की सूजन, अपेँडिक्स, खूनी एवं बादी बवासीर, कब्ज, फोड़े-फुंसी, कील-मुहासे, पित्त और कफ की बीमारी । एक सप्ताह मेँ ही इन समस्याओँ मेँ आराम आने लगता है । -: MY OTHER BLOGS :- > SANSAR (Ghazals) > प्रेरक-विचार > बचत और निवेश...

सोमवार, 15 अगस्त 2011

चाइनीज कैलेंडर कैसे काम करता है

चाइनीज गर्भावस्था कैलेंडर को बहुत ही ऐतिहासिक माना जाता है और यह लगभग 700 साल पुराना भी माना जा रहा है । हर गर्भवती महिला में इस बात को लेकर भी उत्साह रहता है कि उसका होने वाला बच्चा लड़का होगा या लड़की। आज चीनी कैलेंडर का प्रयोग होने वाले बच्चें का लिंग पता करने में किया जा रहा है। चाइनीज कैलेंडर में यह बात ध्यान में रखी जाती है कि गर्भधारण के दौरान मां की लूनर एज क्या थी । होने वाले बच्चे के लिंग का पता करने के लिए यह बहुत ही जानी मानी पद्धति है। चीनी कैलेंडर के बारे में ऐसा कहा जाता है कि सबसे पहले बेजिंग में स्थित विज्ञान संस्थान में इसकी खोज हुई। कुछ लोगों का कहना है कि यह चार्ट पेकिंग के पास टांब में मिला और अब...

शुक्रवार, 5 अगस्त 2011

दिल का अब कुछ नहीँ बिगाड़ेगा दौरा

दिल के दौरे या स्ट्रोक से दिलोदिमाग के टिश्यु को होने वाले नुकसान को अब काफी हद तक रोका जा सकेगा । Scientists ने ऐसी दवा खोजने का दावा किया है , जिसे समय रहते देने पर टिश्यु को होने वाले नुकसान को 60 प्रतिशत तक रोका जा सकेगा । इस दवा का इस्तेमाल ऐसी सर्जरी के दौरान भी किया जा सकेगा, जिसमेँ टिश्युज को ज्यादा नुकसान हो सकता है । दिल का दौरा या स्ट्रोक पड़ने पर दिल या दिमाग के टिश्युज को आँक्सीजन और पोषक तत्वोँ की सप्लाई रूक जाती है । इससे टिश्युज क्षतिग्रस्त होने लगते हैँ । इन पर कहर तब टूटता है , जब दवाओँ आदि के जरिए खून की सप्लाई को बहाल किया जाता है । इसके बहाल होते ही शरीर की प्रतिरक्षण प्रणाली इन क्षतिग्रस्त टिश्युज को 'दुश्मन' मानते हुए...

उमस और गर्मी से आँखेँ बीमार

आमतौर पर अगस्त के महिने से कंजंटिवाइटिस का संक्रमण शुरू हो जाता है । दरअसल , इस महिने मेँ बारिश और उमस के चलते बैक्टीरिया-वायरस का संक्रमण बढ़ जाता है । यही वजह है कि लोगोँ की आँखेँ भी बीमार होने लगती हैँ । यह बीमारी एक मरीज से दूसरे व्यक्ति को आसानी से संक्रमित करती है । इसलिए संक्रमित मरीज से दूरी बनाए रखेँ । ये बैक्टीरिया हैँ जिम्मेदार :- > नाइसीरिया गोनोरिया > स्टेफ्लोकोकस > स्टेपटोकोकस लक्षण (Symtoms) :- * आँखोँ मेँ दर्द । * आँखोँ मेँ गुलाबी या लालीपन । * आँखोँ से पानी बहना । * धुंधला दिखाई देना । * आँखेँ चिपकती हैँ । * वायरल संक्रमण मेँ आँखो के कंजंटाइवा मेँ रक्त के थक्के जम सकते हैँ । *...

मंगलवार, 2 अगस्त 2011

क्या आप जानते है कि बच्चोँ के दाँत मोती जैसे कैसे निकलेँगे ?

क्या आप जानती हैँ कि गर्भावस्था के दौरान आपकी डाईट भी बच्चे के दाँत को प्रभावित करती है ? मोती जैसे चमकते दाँत जहाँ आपके मुखड़े की खूबसूरती मेँ चार चाँद लगाते हैँ , वहीँ उसे तंदरूस्त भी रखते हैँ । दाँत सिर्फ भोजन को चबाकर आसानी से पचाने लायक ही नहीँ बनाते हैँ बल्कि शब्दोँ से सही उच्चारण और चेहरे की खूबसूरती के लिए भी जिम्मेदार होते हैँ । बच्चे का दाँत कैसा होगा , इसके लिए सिर्फ उसका आहार ही जिम्मेदार नहीँ है , बल्कि आप भी जिम्मेदार हैँ । अगर अपनी गर्भावस्था के दौरान कैल्शियम युक्त खाना खाया है तो आपके बच्चे के दाँत भी खूबसूरत और हेल्दी निकलेँगे । गर्भावस्था मेँ माँ का आहार आने वाले बच्चे के दाँतोँ पर असर डालता है । दाँत बनने की प्रक्रिया...

बुधवार, 27 जुलाई 2011

मूंछोँ से हो सकती है एलर्जी

मूंछेँ मर्दोँ की शान होती हैँ , लेकिन ऐसी शान जो जान पर भारी पड़ जाए उसका भला आप क्या करेंगे । यदि आप किसी तरह की एलर्जी से परेशान रहते हैँ तो दाढ़ी या फिर मूंछ रखने से पहले आपको सोचना पड़ेगा । एक अध्ययन के मुताबिक मूंछ रखने वाले लोग सांस सम्बन्धी एलर्जी के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैँ । यदि बार-बार सर्दी-जुकाम , नाक बंद होने , गले मे खराश अथवा सिर दर्द से आप ग्रस्त हो जाते हैँ तो इसका एक कारण आपकी मूंछ भी हो सकती हैँ । मूंछ के बालोँ मेँ मिट्टी फंस जाती है , जिसे एलर्जी होती है । -: MY OTHER BLOGS :- > SANSAR(Ghazals) > प्रेरक-विचार > बचत और निवेश ...

रविवार, 24 जुलाई 2011

इग्नेशिया (IGNATIA)

परिचय :- इग्नेशिया औषधि बच्चों के रोग तथा स्त्रियों में उत्पन्न होने वाले हिस्टीरिया रोग में अत्यन्त लाभकारी होती है। यह औषधि विशेष रूप से उन स्त्रियों के हिस्टीरिया रोग में अधिक लाभकारी होती है जो सुशील, अधिक कार्य करने वाली तथा नाजुक होती हैं। हिस्टीरिया रोग स्त्री में उत्पन्न होने वाले ऐसे रोग हैं जिसे समझ पाना अत्यन्त कठिन है। हिस्टीरिया रोग ऐसी स्त्रियों में होता है जो अधिक संवेदनशील रहती है, बात-बात पर उत्तेजित हो जाती हैं, जिनका रंग सांवला व स्वभाव कोमल होता है, जिनकी बुद्धि तेज होती है तथा किसी बात को आसानी से समझ लेती है। मानसिक या शारीरिक विकास में रुकावट पैदा होने के साथ स्वभाव परिवर्तन। हर बातों का विरोध करना। चलाक, स्नायविक, ‘शंकालु, कठोर, कंपायमान जो मानसिक अथवा शारीरिक रूप से बुरी तरह पीड़ित रहती है तथा कॉफी पीने से रोग में आराम मिलता है। उपरस्थि (सुपरफिसीयल)...

रविवार, 17 जुलाई 2011

रोगों के अनुसार अलसी का सेवन करें

सुपर फुड अलसी में ओमेगा थ्री व सबसे अधिक फाइबर होता है। यह डब्लयू एच ओ ने इसे सुपर फुड माना है। यह रोगों के उपचार में लाभप्रद है। लेकिन इसका सेवन अलग-अलग बीमारी में अलग-अलग तरह से किया जाता है। स्वस्थ व्यक्ति को रोज सुबह-शाम एक-एक चम्मच अलसी का पाउडर पानी के साथ ,सब्जी, दाल या सलाद मंे मिलाकर लेना चाहिए । अलसी के पाउडर को ज्यूस, दूध या दही में मिलाकर भी लिया जा सकता है। इसकी मात्रा 30 से 60 ग्राम प्रतिदिन तक ली जा सकती है। 100-500 ग्राम अलसी को मिक्सर में दरदरा पीस कर किसी एयर टाइट डिब्बे में भर कर रख लें। अलसी को अधिक मात्रा मंे पीस कर न रखें, यह पाउडर के रूप में खराब होने लगती है। सात दिन से ज्यादा पुराना पीसा हुआ पाउडर प्रयोग न करें। इसको एक साथ पीसने से तिलहन होने के कारण खराब हो जाता है। खाँसी होने पर अलसी की चाय पीएं। पानी को उबालकर उसमें अलसी पाउडर मिलाकर चाय तैयार करें। एक चम्मच अलसी...

अलसी में सेक्स समस्या का समाधान

फ्लैक्सीड या अलसी की मदद से सेक्स से जुड़ी समस्याओं का समाधान निकाला जा सकता है। महिलाओं व पुरूषों में सेक्सुअली सक्षम न हो पाने का एक प्रमुख कारण है पेल्विस की रक्त वाहिनियों में रक्त का सही तरीके से प्रवाह न होना। फ्लैक्सीड के लगातार प्रयोग से रक्त वाहिनियां खुल जाती हैं। नब्बे के दशक में फ्लैक्सीड को एक अच्छा एफरोडाइसियेक्स माना जाता था एफरोडाइसियेक्स उत्तेजित करने वाले प्राकृतिक पदार्थ होते हैं। पिछले कुछ दशकों से किसी भी बीमारी के प्राकृतिक तरीके से उपचार पर ज़्यादा जोर दिया जा रहा है, जिसके लिए जड़ी बूटियों व पौधों की मदद से उपचार के तरीकों को अपनाया जा रहा है। फ्लैक्सीड के प्रयोग से भी बहुत सी बीमारियों का उपचार खोजा जा रहा है। सेक्स...

रविवार, 19 जून 2011

स्‍त्री से हार जाता है पुरुष

स्‍त्री का मन पुरुषों के तन को निष्क्रिय कर देता है। कहने का तात्‍पर्य यह है कि स्त्रियों की भावुकता, उनके आंसू पुरुषों के संभोगेच्‍छा को मार डालती है। महिलाएँ भले ही पुरुषों से अपनी बात मनवाने के लिए आसुओं को अपना हथियार मानती हों लेकर उनका यह हथियार उलटवार भी कर सकता है। अनुसंधानकर्ताओं का कहना है महिलाओं के आंसू पुरुषों में सेक्स की इच्छा को कम करते हैं। इसराइल के विज़मान संस्थान के अनुसंधानकर्ताओं ने पाया है कि महिलाओं के आँसुओं में ऐसे रसायन होते हैं जो पुरुषों में कामोत्तेजना को कम करते हैं। संस्थान से जुड़े प्रोफेसर नोआम सोबेल ने बीबीसी को बताया कि महिलाओं के आँसुओं का यह रसायन कामोत्तेजना से जुड़े हारमोन ‘टेस्टोसटेरॉन’ को कम करता है और उनके मस्तिष्‍क में सेक्स के प्रति रुचि को कम करता है। टेस्टोसटेरॉन इस शोध के दौरान अनुसंधानकर्ताओं ने रोने के दौरान महिलाओं के आँसुओं को इकट्ठा...

अण्डॆ(Ovam) के निर्माण काल में बदल जाता है बेटियों का व्यवहार

यदि आपकी 18 से 22 साल की बेटी हर महीने किसी खास पीरियड में आपसे बात करने से कतराए तो समझ जाइए कि उस समय वह प्रजनन(हाई फटार्इल पीरीयड) के उच्च स्तर पर है। यानी उस अवधि में उसके अंदर अंडा निर्माण की प्रक्रिया चल रही है। वह उस अवधि में आकर्षक दिखने के लिए सलीके से कपड़े पहनेगी, सजेगी-संवरेगी, लेकिन अपने पापा से बात करने से झिझकेगी। उसकी मस्‍ती सीमित हो जाती है और वह एकांत पसंद करती है।                                                                   इस अवधि में उसकी आवाज...

शुक्रवार, 3 जून 2011

अब मच्छर नहीँ काट सकेगेँ

मुमकिन है कि जल्द ही आपको मच्छरोँ के काटने से छुटकारा मिल जाए । भारतीय मूल के एक शोधकर्ता की अगुवाई मेँ अमेरिकी Scientists की एक टीम ने ऐसी गैस तैयार करने का दावा किया है जो मच्छरोँ को उलझन मेँ डालकर उनकी सोचने समझने की ताकत छीन लेती है । यूनिवर्सिटी आँफ कैलीफोर्निया के शोधकर्ताओँ ने खुशबूदार अणुओँ का तीन वर्ग तैयार किया है जो मच्छरोँ की इंद्रीय शक्तियोँ को बेकार कर देते हैँ । नतीजतन मच्छरोँ के लिए इंसानोँ का खून पीना मुश्किल हो जाता है । शोधकर्ताओँ का कहना है कि इस खोज से बाजार मेँ नए तरीके के लोशन और स्प्रे आ सकते है । -: MY OTHER BLOGS :- > SANSAR(Ghazals) > प्रेरक-विचार > बचत और निवेश...

मंगलवार, 31 मई 2011

कैँसर की रेडिएशन के जरिए सर्जरी

फेफड़ोँ मेँ यदि शुरूआत मेँ ही कैँसर का पता लग जाए तो रेडियो सर्जरी काफी कारगर है । इस तकनीक मेँ बिना आँपरेशन रेडिएशन के जरिए सर्जरी का जाती है । कैँसर यदि बढ़ गया है तो कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी के ही विकल्प बचते हैँ । सिर से लेकर गले तक के कैँसर मेँ बीमारी के फैलाव के आधार पर रेडियोथेरेपी या कीमोथेरेपी या सर्जरी की जाती है । -: MY OTHER BLOGS :- > SANSAR(Ghazals) > प्रेरक-विचार > बचत और निवेश...

च्युंईँगम से स्मोकिँग को गुडबाय

प्रयाग अस्पताल के डाँ. इमरान कहते हैँ कि प्रमुख दवा निर्माता कंपनी सिपला फार्मास्युटिकल ने 'निकोटेक्स' जबकि फाइजर फार्मा ने 'चैँपिक्स' नाम से कुछ समय पहले च्युंईँगम लांच किये थे । 2 और 4 mg निकोटिन की क्षमता वाले ये च्युंईँगम खाते ही सिगरेट पीने या गुटख या मसाला खाने की तलब बिल्कुल खत्म हो जाती है । इनका असर 2 से 4 घंटे तक रहता है । -: MY OTHER BLOGS :- > SANSAR(Ghazals) > प्रेरक-विचार > बचत और निवेश...

क्योँ लगती है निकोटिन (तंबाकू) की लत ?

सिगरेट का हर कश 10 सेकेंड के अंदर दिमाग को निकोटिन भेजता है । उसी दौरान इसके लती को चुस्ती और मन को शांति का अहसास होता है । यह अहसास ही और कश लेने या गुटखा खाने के लिए प्रेरित करता है । निकोटिन दिमाग के > उस हिस्से को सक्रिय बना देता है और निकोटिन की जरूरत लगातार पड़ने लगती है । जल्द ही दिमाग की संरचना बदल जाती है और व्यक्ति निकोटिन का लती हो जाता है । -: MY OTHER BLOGS :- > SANSAR(Ghazals) > प्रेरक-विचार > बचत और निवेश...

शुक्रवार, 20 मई 2011

फायदेमंद है तरबूज

प्यास बुझाने मेँ तरबूज का जबाब नहीँ । तरबूज का 70 से 80 प्रतिशत भाग खाया जाता है । लाल रंग के गूदे वाले तरबूज मेँ सबसे अधिक लाइकोपिन पाया जाता है । लाइकोपिन एंटीआँक्सीडेँट की तरह काम करता है । तरबूज मेँ बीटा केरोटिन भी प्रचुर मात्रा मेँ पाया जाता है । इसके छिलके मेँ सिट्रलिन रसायन पाया जाता है जो शरीर मेँ एर्जीमिन अमिनो एसिड बनाता है । यह एसिड शरीर से अमोनिया व अन्य विषैले पदार्थोँ को शरीर से बाहर निकालने मेँ सहायता करता है । font color="green"> -: MY OTHER BLOGS :- > SANSAR(Ghazals) > प्रेरक-विचार > बचत और निवेश...

रविवार, 8 मई 2011

संगीत से चिकित्सा होगी अब

अगर आप पेट दर्द या सिर दर्द से तड़पते हुए अस्पताल पहुंचे और वहां पहुंचने पर डाक्टर दवा देने के बजाय आपको संगीत सुनाने लगे तो चौंके नहीं। शायद आपको विश्वास नहीं हो, लेकिन आने वाले समय में संगीत को कई बीमारियों के इलाज का कारगर नुस्खे के तौर पर इस्तेमाल में लाया जाने वाला है। विदेश के साथ साथ भारत के कई अस्पतालों में भी इसका इस्तेमाल किया जा रहा है। स्वास्थ्य पर संगीत के प्रभाव को लेकर अनेक देशों में हुए वैज्ञानिक अध्ययनों से पता चला है कि मनपसंद संगीत सुनने से ब्लड प्रेशर में कमी आती है, दिल की धड़कन नियमित होती है, डिप्रेशन दूर होता है, बेचैनी में कम होती है और ध्यान केंद्रित करने की क्षमता बढ़ती है। आपरेशन के दौरान या उसके बाद दर्द निवारक दवाइयों की जरूरत कम होती है, कीमोथिरेपी के बाद उल्टी की शिकायत कम होती है, दर्द से राहत मिलती है और पार्किसन के रोगी के अंगों में स्थिरता आती है। संगीत...

सोमवार, 2 मई 2011

ऐसे रह सकते हैँ आप हेल्दी

शरीर के लिए डीटाँक्सिफिकेशन उतना ही जरूरी है , जितना घर के लिए सफाई। आप इन टिप्स को फाँलो करके तन-मन साफ रख सकते हैँ : माँडर्न लाइफस्टाइल की वजह से बाँडी कई तरह के विषैले पदार्थोँ यानी टाँक्सिँस के प्रभाव मेँ आ जाती है । इससे बाँडी सुस्त रहती है और सिस्टम भी ढीला पड़ जाता है । जाहिर है , इससे काम पर इफेक्ट पड़ता है । ऐसे मेँ बाँडी को रेग्युलर डीटाँक्सिफाई करना चाहिए यानी ऐसी डाइट लेँ , जिससे बाँडी से टाँक्सिँस निकल जाएँ । क्योँ करेँ डीटाँक्स :- बाँडी मेँ जब विषैले पदार्थ इकटठे होते हैँ , तब काम करने की कैपेसिटी कम हो जाती है । इससे दिमाग भी थका हुआ महसूस करता है और आप पूरी तरह रीलैक्स फील नहीँ कर पाते हैँ । बाँडी मेँ टाँक्सिँस के जमा होने से और भी कई तरह की परेशानियां हो सकती हैँ । मसलन सेल्स मेँ इनके जमा होने से इम्युनिटी सिस्टम कमजोर हो सकता है , जिससे जुकाम , खांसी , लगातार छीँकेँ आती...

शनिवार, 16 अप्रैल 2011

सारे कैँसर को जड़ से मिटा देगा अब एक टीका

कैँसर का टीका तैयार कर रहे Scientists ने कहा है कि अब एक ही इंजेक्शन सभी तरह के टयूमर्स को जड़ से खत्म कर देगा । यह इंजेक्शन दो साल मेँ बाजार मेँ आ जायेगा । योँ तो टीके के जरिये रोगोँ से बचाव किया जाता है, लेकिन टेलोवैक इंजेक्शन का इस्तेमाल इलाज के तौर पर किया जायेगा । मौजूदा दवाओँ मेँ ज्यादातर कैँसर की कोशिकाओँ पर हमला करती हैँ । लेकिन टेलोवैक इंजैक्शन टयूमर्स के खिलाफ शरीर की प्रतिरोधक क्षमता का इस्तेमाल करेगा । इससे इम्यून सिस्टम इस कदर तेज हो जाएगा कि वह टेलोमेराज नाम के एंजाइम को नष्ट कर सकेगा । यह एंजाइम कैँसर की कोशिकाओँ मेँ भारी मात्रा मेँ पाया जाता है । टेलोमेराज के कारण ही कोशिकाएं मरती नहीँ, जबकि स्वस्थ कोशिकाओँ का स्वभाव मर जाना है । कोशिकाओँ के न मरने से टयूमर का विस्तार होता जाता है । ब्रिटेन मेँ अपने तरह के सबसे बड़े ट्रायल मेँ पैँक्रियाटिक कैँसर के आखिरी स्टेज मेँ पहँच चुके 1000...

शुक्रवार, 11 मार्च 2011

डायटिंग को कहें बाय, मोटापे पर मत मचाएं हाय

अगर आपको डायटिंग पसंद नहीं तो अब आप यह बहाना भी मार सकते हैं कि वजन घटाना हमेशा अच्छा नहीं होता। थोड़ा सा मोटा होना और बैलेंस्ड डाइट खाना ज्यादा सेहतमंद है। यह कोई हवाई बात नहीं है, बल्कि रिसर्च में साबित हुई बात है। रिसर्चरों के मुताबिक, यह बात कहकर कुछ ज्यादा ही डराया जाता है कि मोटापा खतरनाक है, पर असल में वजनदार लोग लंबी उम्र जीते हैं। ऐसे लोग अगर जबरदस्ती स्लिम बनने की कोशिश करते हैं तो उनकी सेहत को बड़ा खतरा पैदा हो सकता है। ब्रिटिश अखबार डेली मेल ने न्यूट्रिशन मैगजीन में छपी इस स्टडी के हवाले से बताया है कि लोगों को तरह-तरह की और बैलेंस्ड डाइट लेनी चाहिए। साथ ही बिना फिक्र किए मजे के साथ एक्सरसाइज करनी चाहिए। फिर चाहे आपका वजन कुछ पाउंड ज्यादा ही क्यों न हो। स्टडी करने वालों में शामिल एक डायटीशियन ने दावा किया है कि डायटिंग को लेकर लोगों का जुनून खास काम नहीं आता। खाना सामने आते...

हाई ब्लड प्रेशर क्यों होता है, पता चल गया

शरीर में आखिर किस वजह से हाई ब्लड प्रेशर होता है, ब्रिटिश वैज्ञानिकों ने यह जानने का दावा किया है। अब हाई बीपी के इलाज के नए तरीके ढूंढे जा सकते हैं। शरीर किस तरह से ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करता है, इसके एक जरूरी स्टेप के बारे में कैंब्रिज यूनिवर्सिटी और नॉटिंघम यूनिवर्सिटी के रिसर्चरों ने पता लगाया है। यह भी पता चला है कि इस प्रक्रिया में कब गड़बड़ी हो जाती है। स्टडी से जुड़े प्रो. रॉबिन कैरल कहते हैं, मुख्य प्रक्रिया का पहला कदम जान लिया है। रिसर्चरों का मानना है कि इस प्रक्रिया को फोकस में रखकर गड़बड़ियां रोकी जा सकती हैं और हाइपरटेंशन पर काबू पाया जा सकेगा। मौजूदा दवाइयों का फोकस ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने वाली प्रक्रिया के आखिरी स्टेज पर होता है। नई स्टडी से उम्मीद है कि शुरुआती स्थिति में ही हाई ब्लड प्रेशर रोका जा सकेगा। दुनिया भर में लाखों लोग हाइपरटेंशन से परेशान हैं। इससे...

गुरुवार, 24 फ़रवरी 2011

खुदकुशी रोकने की बनेगी दवा

हर साल दुनिया भर में लाखों लोग तनाव और अवसाद का शिकार होकर अपनी जिंदगी खत्म कर लेते हैं। उनके इस भयानक इरादे का करीबी लोगों को भनक तक नहीं लगती लेकिन अब इस दिशा में बड़ी उम्मीद जगी है। अब यह जानना संभव हो सकेगा कि व्यक्ति कहीं आत्महत्या जैसा कदम उठाने की ओर तो नहीं बढ़ रहा। ऐसा शरीर में मौजूद एक खास प्रोटीन का स्तर जान कर किया जा सकता है। वैज्ञानिकों ने इस प्रोटीन की पहचान कर ली है। कनाडा के शोधकर्ताओं ने उस रहस्य को सुलझा लेने का दावा किया है जिसके कारण लोग आत्महत्या करते हैं या बहुत गहरे अवसाद का शिकार हो जाते हैं। एक अध्ययन के दौरान शोधकर्ताओं ने पाया कि जो लोग आत्महत्या करते हैं, उनके दिमाग में एक खास तरह की प्रोटीन का स्तर बढ़ जाता है। यूनिवर्सिटी आफ वेस्टर्न ओंटारियो के माइकल पोल्टर और चा‌र्ल्टन यूनिवर्सिटी के हाइमी एनिसमैन के नेतृत्व वाले एक अंतरराष्ट्रीय शोध दल ने अपने अध्ययन के...

सोमवार, 7 फ़रवरी 2011

हृदय रोगोँ का प्रभावी इलाज

ह्दय रोग मे प्याज का रस काफी लाभकारी पाया गया है. सुबह के समय कच्चे सफेद प्याज का रस दो छोटे चम्मच पीने से हदय रोग के किसी भी अवस्था में लाभ मिलता है. डा० सत्यव्रत सिद्धान्तालंकार ने अपनी पुस्तक "रोग और उनकी होम्योपैथिक चिकित्सा" मे इसके बारे जिक्र करते हुए लिखा है कि अरब के एक उच्च कोटि के धनी मानी व्यक्ति का कथन है कि उसे ह्दय के रोग के दौरे पडते थे. उसने अपने घर में कार्डियोग्राम की मशीन लगा रखी थी. और प्रतिदिन वह अपने ह्दय की गति की जाँच करवाया करता था. डाक्टरों ने उसे बीसियों गोलियां खाने को दिया था. अरब के एक हकीम ने उसे प्याज का रस पीने का नुख्सा बताया था. उसने आजमाया और उसका ह्दय का रोग जाता रहा. उसने डाक्टरों की गोलियां और मशीन सभी अलग कर दी और प्याज का दो चम्मच रस प्रतिदिन पीने से वह स्वस्थ हो गया । लखनऊ के किंग जार्ज मेडिकल कालेज के डा० एन० एन० गुप्त ने अपने परीक्षणों के आधार...

गुरुवार, 13 जनवरी 2011

अब डाइटिँग बिना भी घट सकेगा वजन

डाइट मेँ बिना बदलाव किए अब एक हफ्ते मेँ 2 पाउंड वजन कम किया जा सकता है । एक अमेरिकी दवा कम्पनी ने दावा किया है कि विकसित की गई नई गोली जेडजीएन(ZGN)-433 मोटापा कम करने मेँ सफल है । कंपनी ने इस गोली का करीब 24 ऐसी मोटी महिलाओँ पर परीक्षण किया , जिन्होँने एक माह के भीतर हर हफ्ते अपना वजन कम किया । इस गोली को खाने के दौरान डाइटिँग व कसरत करने की भी जरूरत नहीँ है । यह गोली नौ माह मेँ 20 से 40 फीसदी तक वजन को कम कर देती है । -: MY OTHER BLOGS :- > SANSAR(Ghazals) > प्रेरक-विचार > बचत और निवेश...

शनिवार, 8 जनवरी 2011

सर्दी मेँ त्वचा की खुश्की , खुजली तथा सिर की रूसी का प्रभावी इलाज

जैसा कि आप सभी जानते है की सर्दी के मौसम मेँ जब शीत लहर चलती है तो हमारी त्वचा अपनी नमी ( मायश्चर) खो देती है जिससे हमारी त्वचा खुश्क हो जाती है तथा त्वचा मेँ खुजली व जलन होने लगती है । इससे बचने के लिए हमेँ हल्के गुनगुने पानी से स्नान करना चाहिए क्योँकि ठंडे पानी से स्नान करने पर शरीर के रोम छिद्र पूरी तरह नहीँ खुल पाते हैँ जिससे त्वचा को आक्सीजन नहीँ मिल पाती है । अतः हल्के गुनगुने पानी से नहाने के बाद यदि ग्लिसरीन और गुलाब जल के मिश्रण की पूरे शरीर पर मालिश की जाए तो हम इस समस्या से बच सकते हैँ । -: मिश्रण बनाना :- * 25 ml. ग्लिसरीन तथा 75 ml. गुलाब जल को लेकर एक साफ शीशी मेँ Mix करलेँ । इस प्रकार अब ये आपके लिए लोशन तैयार हो गया । -: लोशन की प्रयोग विधि :- * हल्के गुनगुन पानी से स्नान के बाद रोएदार तौलिए से शरीर को सुखाकर इस लोशन से मालिश करिए और 48 घण्टे मेँ फायदा...

बुधवार, 5 जनवरी 2011

भविष्य की बीमारियोँ की पहचान हुई आसान

अगर सब कुछ ठीक रहा तो वह दिन दूर नहीँ जब आपको होने वाली आनुवांशिक बीमारी का पता पहले ही चल जाएगा । ब्रिटेन के Scientists ने एक ऐसी नई तकनीक विकसित करने का दावा किया है, जो किसी भी व्यक्ति के जीनोम को कुछ मिनटोँ मेँ ही तैयार कर सकता है । वह भी मौजूदा खर्चोँ की तुलना मेँ बेहद कम दामोँ पर । दरअसल शरीर का सारा राज जीन मेँ छुपा होता है । इसके भंडार को जीनोम कहते है । हमारा जीनोम 31 लाख अलग अलग फाँर्मूलोँ से बना है । इन्हीँ फाँर्मूलोँ मेँ छुपा है सारा राज । इंपीरियल काँलेज लंदन की एक टीम ने इस तकनीक का पेटेँट कराया है । इसके तहत आगामी दस साल मेँ बहुत ही तेजी से व्यावसायिक तौर पर DNA की सीक्वेँसिग की जा सकेगी । इससे साफ है कि इंसान के DNA को डिकोड करके यह बताया जा सकता है कि आगे वह कौन सी बीमारी का शिकार होगा । यह शोध नैनो जर्नल मेँ प्रकाशित हुआ है । शोधकर्ताओँ ने पाया कि प्रयोगशाला मेँ एक...

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