सोमवार, 2 फ़रवरी 2026

चिंगम चबाने से कौन सी बीमारी ठीक होती है

 


आजकल हम में से बहुत से लोग चिंगम (Chewing Gum) चबाना पसंद करते हैं। कोई इसे माउथ फ्रेशनर की तरह इस्तेमाल करता है, तो कोई सिर्फ अपने स्ट्रेस को कम करने के लिए। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि यह छोटी सी चिंगम आपकी सेहत के लिए कितनी फायदेमंद हो सकती है?

साइंस और कई रिसर्च में यह बात सामने आई है कि चिंगम चबाने से न केवल आपके चेहरे की मांसपेशियों की एक्सरसाइज होती है, बल्कि यह कुछ खास बीमारियों और मानसिक समस्याओं में भी राहत दिलाती है। हालांकि, इसे सही तरीके और सही मात्रा में चबाना बहुत जरूरी है।

इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि चिंगम चबाने के फायदे (Benefits of Chewing Gum) क्या हैं और यह किन स्वास्थ्य समस्याओं को दूर करने में आपकी मदद कर सकती है। साथ ही हम इसके कुछ जरूरी पहलुओं पर भी नजर डालेंगे जो आपके सामान्य ज्ञान के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं।


चिंगम चबाने के फायदे और स्वास्थ्य पर प्रभाव (Health Benefits of Chewing Gum)

चिंगम चबाना सिर्फ एक शौक नहीं है, बल्कि इसके पीछे कई वैज्ञानिक कारण भी छिपे हैं। जब आप चिंगम चबाते हैं, तो आपके दिमाग में ब्लड सर्कुलेशन बढ़ जाता है। इससे आपकी एकाग्रता (Concentration) और याददाश्त में सुधार होता है।

इसके अलावा, चिंगम चबाने से पेट में एसिड बनने की प्रक्रिया पर भी असर पड़ता है। जो लोग अक्सर एसिडिटी (Acidity) या सीने में जलन से परेशान रहते हैं, उनके लिए शुगर-फ्री चिंगम काफी मददगार साबित हो सकती है। यह लार (Saliva) के उत्पादन को बढ़ाती है, जो एसिड को बेअसर करने में मदद करता है।

मानसिक स्वास्थ्य की बात करें तो स्ट्रेस और एंग्जायटी (Stress and Anxiety) को कम करने में भी चिंगम चबाना एक अच्छा विकल्प माना जाता है। रिसर्च बताती है कि चबाने की क्रिया से शरीर में ‘कोर्टिसोल’ (तनाव हार्मोन) का स्तर कम होता है, जिससे आप शांत महसूस करते हैं।

चिंगम चबाने से ठीक होने वाली समस्याएं और बीमारियां

चिंगम चबाने से सीधे तौर पर कोई गंभीर बीमारी जड़ से खत्म नहीं होती, लेकिन यह कई बीमारियों के लक्षणों को कम करने और रिकवरी में बहुत प्रभावी है। नीचे इसके मुख्य फायदों की सूची दी गई है:


याददाश्त और फोकस (Memory and Focus Improvement)

कई अध्ययनों से पता चला है कि चिंगम चबाने से दिमाग के ‘हिप्पोकैम्पस’ हिस्से में रक्त का प्रवाह बढ़ता है। यह हिस्सा याददाश्त (Memory) के लिए जिम्मेदार होता है। इससे विद्यार्थियों और ऑफिस जाने वालों को काम पर फोकस करने में मदद मिलती है।


एसिडिटी और सीने में जलन (Heartburn and Acid Reflux)

जब आप चिंगम चबाते हैं, तो मुँह में लार ज्यादा बनती है। यह लार जब खाने की नली के जरिए नीचे जाती है, तो पेट के एसिड को संतुलित करती है। भोजन के बाद 20-30 मिनट तक शुगर-फ्री चिंगम चबाने से एसिडिटी में राहत मिलती है।


दांतों की सड़न और कैविटी (Dental Cavity Prevention)

अगर आप जाइलिटोल (Xylitol) वाली चिंगम का उपयोग करते हैं, तो यह मुँह के हानिकारक बैक्टीरिया को खत्म करती है। यह दांतों के इनेमल को मजबूत बनाने और कैविटी (Cavity) को रोकने में सहायक होती है।


तनाव और डिप्रेशन (Stress and Depression)

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव (Stress) एक बड़ी समस्या है। चिंगम चबाने की रिदमिक (लयबद्ध) क्रिया दिमाग को शांत रखने में मदद करती है। यह घबराहट को कम करके मूड को बेहतर बनाने का काम करती है।


वजन घटाने में सहायक (Weight Loss Aid)

चिंगम चबाने से बार-बार कुछ मीठा या अनहेल्दी खाने की इच्छा (Cravings) कम हो जाती है। यह आपकी भूख को दबाने में मदद करती है, जिससे आप कैलोरी कम लेते हैं और वजन घटाने (Weight Loss) में आसानी होती 


चिंगम चबाते समय बरतने वाली सावधानियां

हालांकि चिंगम चबाने के फायदे अनेक हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि आप इसे पूरे दिन चबाते रहें। ज्यादा समय तक चिंगम चबाने से आपके जबड़े में ‘टीएमजे’ (Temporomandibular Joint) की समस्या हो सकती है, जिससे दर्द पैदा होता है।

हमेशा शुगर-फ्री (Sugar-Free) चिंगम का ही चुनाव करें। चीनी वाली चिंगम चबाने से दांतों में कीड़े लगने और शुगर लेवल बढ़ने का खतरा रहता है। साथ ही, छोटे बच्चों को चिंगम देने से बचें क्योंकि वे इसे निगल सकते हैं, जो पेट के लिए हानिकारक हो सकता है।

ज्यादा चिंगम चबाने से कुछ लोगों को पेट फूलने या गैस की समस्या भी हो सकती है, क्योंकि चबाते समय हवा भी शरीर के अंदर जाती है। इसलिए संतुलन बनाए रखना बहुत जरूरी है।


 चिंगम के बारे में रोचक तथ्य

क्या आप जानते हैं कि प्राचीन समय में लोग पेड़ों के गोंद को चिंगम की तरह चबाते थे? आज की आधुनिक चिंगम को बनाने में सिंथेटिक रबर और मिठास का उपयोग किया जाता है।

द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान अमेरिकी सैनिकों को तनाव कम करने और ध्यान केंद्रित करने के लिए राशन में चिंगम दी जाती थी। तब से ही इसे मानसिक एकाग्रता (Mental Alertness) के लिए एक टूल के रूप में देखा जाने लगा।

आजकल कई डॉक्टर सर्जरी के बाद मरीजों को चिंगम चबाने की सलाह देते हैं ताकि उनकी आंतों की गतिविधि (Bowel Movement) जल्दी सामान्य हो सके। यह चिकित्सा जगत में एक स्वीकृत तथ्य है।




गुरुवार, 18 नवंबर 2021

महिलाओं और पुरुषों में बांझपन (इनफर्टिलिटी) को ऐसे करें दूर।



 

आज के बदलते लाइफस्टाइल के कारण इंफर्टिलिटी की समस्या बहुत देखने को मिल रही है। पुरुष हो या महिला इंफर्टिलिटी के कारण पेरेंट्स बनने का सपना अधूरा रह जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं अपने खानपान में थोड़ा सा बदलाव करके आप इंफर्टिलिटी की समस्या को दूर करने की कोशिश कर सकते हैं। आज हम आपको बता रहे हैं कैसे ड्रमस्ट्रिक यानी सहजन सब्जी इंफर्टिलिटी की समस्या को दूर करने में मदद कर सकती है।


मोरिंगा(सहजन) पोषक तत्वों से भरपूर होता है ।

ड्रमस्टिक एक सुपरफूड के रूप में उपयोग किया जाता है जो पुरानी बीमारियों को दूर कर सकता है। इसमें प्रचुर मात्रा में एंटीऑक्सिडेंट होते हैं। इसमें कई तरह के पोषक तत्व होते हैं. जैसे- कार्बोहाइड्रेट, फाइबर, प्रोटीन, विटामिन, फोलेट, कैल्शियम, आयरन, मैग्नीशियम, फास्फोरस, पोटेशियम, सोडियम और जिंक।

इंफर्टिलिटी के लिए ड्रमस्टिक(सहजन)।


ड्रमस्टिक में भरपूर मात्रा में जिंक होता है जो कि महिलाओं की इंफर्टिलिटी की समस्या को दूर करने में मदद कर सकता है। वहीं ड्रमस्टिक में मौजूद टेरिगोस्पर्मिन नामक यौगिक के कारण होती है जो शुक्राणुओं की संख्या (Sperm Count) बढ़ाने और उन्हें  गतिशीलता बनाने में मदद करता है।

रिसर्च क्या कहती है।

अमेरिकन जर्नल ऑफ न्यूरोसाइंस में प्रकाशित एक शोध में पाया गया है ड्रमस्टिक कामेच्छा बढ़ाकर और परफॉर्मेंस में सुधार करने में मदद करता है। इसके अलावा ये टेस्टोस्टेरोन के स्तर में सुधार करने, मर्दानगी बढ़ाने में भी मदद करता है. इतना ही नहीं, ड्रमस्टिक को 'इंडियन वियाग्रा' के रूप में भी जाना जाता है। ये इरेक्टाइल डिसफंक्शन और इंफर्टिलिटी जैसी समस्याओं को हल करने के लिए बेहद प्रभावी है।


गर्भावस्था और स्तनपान के लिए ड्रमस्टिक फायदेमंद है।


मोरिंगा गर्भवती महिलाओं के समग्र स्वास्थ्य को बढ़ावा देने में फायदेमंद हैं. सहजन को डाइट में शामिल करने से गर्भवती महिलाओं को मॉर्निंग सिकनेस के लक्षणों का मुकाबला करने और उन्हें ऊर्जावान महसूस करने में मदद मिल सकती है। इसके अलावा, ड्रमस्टिक में फोलेट की प्रचुरता स्पाइना बिफिडा (spina bifida) एक तंत्रिका ट्यूबल दोष (neural tubal defect) के जोखिम को टाल सकती है जिससे नवजात शिशु में गंभीर जन्म दोष हो सकते हैं।. इसके अलावा मोरिंगा के पत्तों का रस घी में मिलाकर प्रसव के बाद महिलाओं को दिया जाता है जिससे स्तन के दूध का स्राव बेहतर होता है।

मंगलवार, 7 जुलाई 2020

वायरस न होते तो कैसी होती दुनिया ।

इस समय पूरी दुनिया कोविड-19 महामारी की गिरफ्त में है। इसके लिए एक वायरस जिम्मेदार है, जिसे नया कोरोना वायरस या SARS CoV-2 नाम दिया गया है। इंसानियत पर कहर बरपाने वाला ये पहला वायरस नहीं है।

शुक्रवार, 12 जून 2020

स्वच्छ रक्त वाहिकाएं अच्छे स्वास्थ्य के लिए आधार हैं. ऐसा क्यों?

  •  स्वच्छ रक्त वाहिकाएं अच्छे स्वास्थ्य के लिए आधार हैं।
यह बहुत ही आसान है। शरीर में अंगों और प्रणालियों का कार्य रक्त परिसंचरण की गुणवत्ता पर निर्भर करता है।

बुधवार, 27 मई 2020

A KIDNEY (IN URETER) STONE REMOVE IN ONLY 10 DAYS

एक पुरुष पेशेंट जिसकी उम्र 20 yrs है। वह युरेटर की पथरी(Stone) से पीड़ित था। उसके बहुत तेज दर्द था तथा पेशाब में खून(Blood) भी आ रहा था।

शुक्रवार, 27 मार्च 2020

कोरोना एप के द्वारा पता लग सकेगा कोरोना का ।

CoronaVirus के खिलाफ भारत समेत पूरी दुनिया जंग लड़ रही है। इस बीच, इस महामारी से बचने के उपायों को लेकर भी जद्दोजहद जारी है।

शनिवार, 21 मार्च 2020

थर्मल स्कैनर (Thermal Scanner)


कोरोना वायरस की वजह से पूरी दुनिया में हड़कंप मचा हुआ है। चीन के वुहान शहर से फैला यह वायरस लगभग पूरी दुनिया में अपने पैर पसार चुका है।

कोरोना वायरस (Corona virus)के लक्षणों को समझें

इस वायरस के प्राथमिक लक्षण क्या हैं यह भी अब तो सभी पता चल गए होंगे |


एहतियात के तौर पर कोरोना वायरस के यह हैं लक्षण जिसे देखे और समझे।

1 -3 दिन

कोरोना वायरस के प्राथमिक पहले 1 -3 दिनों तक मामूली बुखार चढ़ना मामूली सा गले में दर्द होना यह लक्षण दिखाई देते है |

चौथा दिन

चौथे दिन से गले में दर्द महसूस होना ,व्यक्ति की आवाज बदल जाना ,शरीर का अचानक तापमान बढ़ जाना ,सिरदर्द बढ़ जाना इत्यादि लक्षण नजर आ जाते हैं |

पांचवा दिन

पहले 4 दिनों के लक्षण के बाद पांचवे दिन शरीर को थकान हो जाती है ,सर दर्द ,खाँसी बरक़रार रह जाती हैं |

छठा दिन

इस दिन बुखार 37 सेल्सियस तक बढ़ जाता हैं , जोरदार खांसी ,सांस लेने में तकलीफ और उल्टियाँ शुरू होना यह लक्षण नजर आ जाते हैं |

सातवा दिन

सातवे दिन भी तेज बुखार ,खाँसी और थूँकना बढ़ जाना ,शरीर दर्द, उल्टिया और जुलाब यह लक्षण दिखाई देते हैं |

8 -9 दिन

इन दिनों में तेज बुखार 37 -38 सेल्सियस तक ,असहनीय खाँसी और सांस लेने में कठिनाई हो जाती हैं |
इस स्थिति में अपने डॉक्टर की सलाह ले साथ ही ब्लड टेस्ट और x -ray कराकर जांच कर ले की आप covid -19 से ग्रस्त तो नहीं हैं |

 
Powered by Blogger