
एक अनार सौ बीमार वाली कहावत आपने सुनी ही होगी। मीठा अनार
तीनों दोषों का शमन करने वाला, तृप्तिकारक, वीर्यवर्धक, हल्का,
कसैले रसवाला, बुद्धि तथा बलदायक एवं प्यास, जलन, ज्वर,
हृदयरोग, कण्ठरोग, मुख की दुर्गन्ध तथा कमजोरी को दूर करने
वाला है।
खटमिट्ठा अनार अग्निवर्धक, रूचिकारक, थोड़ासा पित्तकारक
व हल्का होता है। पेट के कीड़ों का नाश करने व हृदय को बल देने के
लिए अनार बहुत उपयोगी है। इसका रस पित्तशामक है। इससे
उल्टी बंद होती है।
अनार पित्तप्रकोप, अरूचि, अतिसार, पेचिश, खांसी, नेत्रदाह,
छाती का दाह व व्याकुलता दूर करता है।
सिर दर्द: गर्मियों में सिरदर्द हो, लू लग जाये, आँखें लाल-लाल हो जायें तब
अनार का शरबत गुणकारी सिद्ध होता है।
इसका रस स्वरयंत्र,...