मंगलवार, 7 जुलाई 2020

वायरस न होते तो कैसी होती दुनिया ।

इस समय पूरी दुनिया कोविड-19 महामारी की गिरफ्त में है। इसके लिए एक वायरस जिम्मेदार है, जिसे नया कोरोना वायरस या SARS CoV-2 नाम दिया गया है। इंसानियत पर कहर बरपाने वाला ये पहला वायरस नहीं है। विषाणुओं ने कई बार मानवता को भयंकर चोट पहुंचाई है। 1918 में दुनिया पर कहर ढाने वाले इन्फ्लुएंजा वायरस से पांच से दस करोड़ लोग मारे गए थे। वहीं अकेले बीसवीं सदी में चेचक के वायरस ने कम से कम बीस करोड़ लोगों की जान ले ली होगी।


इन मिसालों को देख कर तो यही लगता है कि वायरस हमारे लिए बड़ा खतरा हैं और इनका धरती से खात्मा हो जाना चाहिए। काश की ऐसी कोई जादुई छड़ी होती, जो धरती से सारे विषाणुओं का सफाया कर देती।करने से पहले सावधान हो जाइए। अगर ऐसा हुआ, तो हम भी नहीं बचेंगे। बिना वायरस के इंसान ही नहीं, इस धरती में जीवन का अस्तित्व मुमकिन नहीं है।अमेरिका की विस्कॉन्सिन-मेडिसन यूनिवर्सिटी के महामारी विशेषज्ञ टोनी गोल्डबर्ग कहते हैं, 'अगर अचानक धरती से सारे वायरस खत्म हो जाएंगे, तो इस धरती के सभी जीवों को मरने में बस एक से डेढ़ दिन का वक्त लगेगा। वायरस इस धरती पर जीवन को चलाने की धुरी हैं। इसलिए हमें उनकी बुराइयों की अनदेखी करनी होगी।'


दुनिया में कितने तरह के वायरस हैं, इसका अभी पता नहीं है। पता है तो बस ये बात कि ये ज्यादातर विषाणु इंसानों में कोई रोग नहीं फैलाते। हजारों वायरस ऐसे हैं, जो इस धरती का इकोसिस्टम चलाने में बेहद अहम रोल निभाते हैं। फिर चाहे वो कीड़े-मकोड़े हों, गाय-भैंस या फिर इंसान। मेक्सिको की नेशनल ऑटोनॉमस यूनिवर्सिटी की वायरस विशेषज्ञ सुसाना लोपेज शैरेटन कहती हैं कि, 'इस धरती पर वायरस और बाकी जीव पूरी तरह संतुलित वातावरण में रहते हैं। बिना वायरस के हम नहीं बचेंगे।'

ज्यादातर लोगों को ये पता ही नहीं कि वायरस इस धरती पर जीवन को चलाने के लिए कितने इम्पॉर्टेंट हैं। इसकी एक वजह ये है कि हम केवल उन्हीं वायरसों के बारे में रिसर्च करते हैं, जिनसे बीमारियां होती हैं। हालांकि अब कुछ साहसी वैज्ञानिकों ने वायरस की अनजानी दुनिया की ओर कदम बढ़ाया है।

अब तक केवल कुछ हजार वायरसों का पता इंसान को है जबकि करोड़ों की संख्या में ऐसे वायरस हैं, जिनके बारे में हमें कुछ पता ही नहीं। पेन्सिल्वेनिया स्टेट यूनिवर्सिटी की मैरिलिन रूसिंक कहती हैं कि, 'विज्ञान केवल रोगाणुओं का अध्ययन करता है। ये अफसोस की बात है, मगर सच यही है।'

अब चूंकि ज्यादातर वायरसों के बारे में हमें पता ही नहीं, तो ये भी नहीं पता कि कितने वायरस इंसान के लिए खतरनाक हैं। ब्रिटिश कोलंबिया यूनिवर्सिटी के विषाणु वैज्ञानिक कर्टिस सटल कहते हैं कि, 'अगर वायरस प्रजातियों की कुल संख्या के हिसाब से देखें, तो इंसान के लिए खतरनाक विषाणुओं की संख्या शून्य के आस पास होगी।'इकोसिस्टम की धुरी हैं वायरस

हमारे लिए वो वायरस सबसे महत्वपूर्ण हैं, जो बैक्टीरिया को संक्रमित करते हैं। इन्हें फेगस कहते हैं. जिसका अर्थ है निगल जाने वाले। टोनी गोल्डबर्ग कहते हैं कि समंदर में बैक्टीरिया की आबादी नियंत्रित करने में फेगस विषाणुओं का बेहद अहम रोल है। अगर ये वायरस खत्म हो जाते हैं, तो अचानक से समुद्र का संतुलन बिगड़ जाएगा।

समुद्र में 90 फीसदी जीव, माइक्रोब यानी छोटे एक कोशिकाओं वाले जीव हैं। ये धरती की आधी ऑक्सीजन बनाते हैं और ये काम वायरस के बिना नहीं हो सकता। समंदर में पाए जाने वाले वायरस वहां के आधे बैक्टीरिया और 20 प्रतिशत माइक्रोब्स को हर रोज मार देते हैं।

इससे समुद्र में मौजूद काई, शैवाल और दूसरी वनस्पतियों को खुराक मिलती है, जिससे वो फोटो सिंथेसिस करके, सूरज की रौशनी की मदद से ऑक्सीजन बनाते हैं और इसी ऑक्सीजन से धरती पर जिंदगी चलती है। अगर वायरस खत्म हो जाएंगे, तो समुद्र में इतनी ऑक्सीजन नहीं बन पाएगी। फिर पृथ्वी पर जीवन नहीं चल सकेगा। कर्टिस सटल कहते हैं कि, 'अगर मौत न हो, तो जिंदगी मुमकिन नहीं, क्योंकि जिंदगी, धरती पर मौजूद तत्वों की रिसाइकिलिंग पर निर्भर करती है और इस रिसाइकिलिंग को वायरस करते हैं।'दुनिया में जीवों की आबादी कंट्रोल करने के लिए भी वायरस जरूरी हैं। जब भी किसी जीव की आबादी बढ़ती है, तो विषाणु उस पर हमला करके आबादी को नियंत्रित करते हैं। जैसे कि महामारियों के जरिए इंसान की आबादी नियंत्रित होती है। वायरस न होंगे, तो धरती पर जीवों की आबादी आउट ऑफ कंट्रोल हो जाएगी। एक ही प्रजाति का बोलबाला होगा, तो जैव विविधता समाप्त हो जाएगी।

कुछ जीवों का तो अस्तित्व ही वायरसों पर निर्भर है। जैसे कि गायें और जुगाली करने वाले दूसरे जीव। वायरस इन जीवों को घास के सेल्यूलोज को शुगर में तब्दील करने में मदद करते हैं और फिर यही उनके शरीर पर मांस चढ़ने और उनके दूध देने का स्रोत बनती है।इंसानों और दूसरे जीवों के भीतर पल रहे बैक्टीरिया को कंट्रोल करने में भी वायरस का बड़ा योगदान होता है। अमेरिका के मशहूर यलोस्टोन नेशनल पार्क की घास भयंकर गर्मी बर्दाश्त कर पाती है, तो इसके पीछे वायरस का ही योगदान है। ये बात रूसिंक और उनकी टीम ने अपनी रिसर्च से साबित की है।

हलापेनो के बीज में पाए जाने वाले वायरस इसे उन कीड़ों से बचाते हैं, जो पौधों का रस सोखते हैं। रूसिंक की टीम ने अपनी रिसर्च में पाया है कि कुछ पौधे और फफूंद, वायरस को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को सौंपते जाते हैं, ताकि उनका सुरक्षा चक्र बना रहे। अगर वायरस फायदेमंद न होते, तो पौधे ऐसा क्यों करते?वायरस बनाते हैं इंसानों का सुरक्षा चक्र

कई वायरस का संक्रमण हमें खास तरह के रोगाणुओं से बचाता है। डेंगू के लिए जिम्मेदार वायरस का एक दूर का रिश्तेदार GB वायरस C एक ऐसा ही वायरस है। इससे संक्रमित व्यक्ति में एड्स की बीमारी तेजी से नहीं फैलती और अगर ये वायरस किसी इंसान के शरीर में है, तो उसके इबोला वायरस से मरने की आशंका कम हो जाती है। हर्पीज वायरस हमें प्लेग और लिस्टेरिया नाम की बीमारियों से बचा सकता है। हर्पीज के शिकार चूहे, इन बीमारियों के बैक्टीरिया से बच जाते हैं।

वायरस हमारे कई बीमारियों से लड़ने की दवा भी बन सकते हैं। 1920 के दशक में सोवियत संघ में इस दिशा में काफी रिसर्च हुई थी। अब दुनिया में कई वैज्ञानिक फिर से वायरस थेरेपी पर रिसर्च कर रहे हैं। जिस तरह से बैक्टीरिया, एंटी बायोटिक से इम्यून हो रहे हैं, तो हमें जल्द ही एंटी बायोटिक का विकल्प तलाशना होगा। वायरस ये काम कर सकते हैं। वो रोग फैलाने वाले बैक्टीरिया या कैंसर कोशिकाओं का खात्मा करने में काम आ सकते हैं।कर्टिस सटल कहते हैं कि, 'इन रोगों से लड़ने के लिए हम वायरस को ठीक उसी तरह इस्तेमाल कर सकते हैं, जैसे कोई गाइडेड मिसाइल हो। जो सीधे लक्ष्य पर यानी नुकसानदेह रोगाणुओं पर निशाना लगाएंगे, बैक्टीरिया या कैंसर की कोशिकाओं का खात्मा कर देंगे। वायरस के जरिए हम तमाम रोगों के इलाज की नई पीढ़ी की दवाएं तैयार कर सकते हैं।'

चूंकि वायरस लगातार बदलते रहते हैं, इसलिए इनके पास जेनेटिक जानकारी का खजाना होता है। ये दूसरी कोशिकाओं में घुस कर अपने जीन को कॉपी करने के सिस्टम पर कब्जा कर लेते हैं। इसलिए, इन वायरस का जेनेटिक कोड हमेशा के लिए उस जीव की कोशिका में दर्ज हो जाता है। हम इंसानों के आठ प्रतिशत जीन भी वायरस से ही मिले हैं। 2018 में वैज्ञानिकों की दो टीमों ने पता लगाया था कि करोड़ों साल पहले वायरस से हमें मिले कोड हमारी याददाश्त को सहेजने में बड़ी भूमिका निभाते हैं।अगर, आज इंसान अंडे देने के बजाय सीधे बच्चे को जन्म दे पाते हैं, तो ये भी एक वायरस के इन्फेक्शन का ही कमाल है। आज से करीब 13 करोड़ साल पहले इंसान के पूर्वजों में रेट्रोवायरस का संक्रमण बड़े पैमाने पर फैला था। उस संक्रमण से इंसानों की कोशिकाओं में आए एक जीन के कारण ही, इंसानों में गर्भ धारण और फिर अंडे देने के बजाय सीधे बच्चा पैदा करने की खूबी विकसित हुई।

धरती पर वायरस ये जो तमाम भूमिकाएं निभा रहे हैं, उनके बारे में अभी वैज्ञानिकों ने रिसर्च शुरू ही की हैं। हम जैसे-जैसे इनके बारे में और जानकारी हासिल करेंगे, तो हम वायरस का और बेहतर इस्तेमाल कर पाएंगे। शायद उनसे हमें कई बीमारियों से लड़ने का जरिया मिले या अन्य ऐसी मदद मिले, जिससे इंसानियत ही नहीं, पूरी धरती का भला हो। इसलिए वायरस से नफरत करने के बजाय उनके बारे में और जानने की कोशिश लगातार जारी रहनी चाहिए।

शुक्रवार, 12 जून 2020

स्वच्छ रक्त वाहिकाएं अच्छे स्वास्थ्य के लिए आधार हैं. ऐसा क्यों?

  •  स्वच्छ रक्त वाहिकाएं अच्छे स्वास्थ्य के लिए आधार हैं।
यह बहुत ही आसान है। शरीर में अंगों और प्रणालियों का कार्य रक्त परिसंचरण की गुणवत्ता पर निर्भर करता है। रक्त परिसंचरण का अर्थ है कि ऑक्सीजन और पोषक तत्वों को आंतरिक अंगों तक पहुंचाना, साथ ही साथ कार्बन डाइऑक्साइड और चयापचय उत्पादों को इकट्ठा करना। बचपन में, किशोरावस्था, युवावस्था, हम अधिक चलते हैं, नसें लोचदार और साफ होती हैं - अंगों का पोषण अधिकतम होता है।
 
उम्र के साथ, हम चलना कम कर देते हैं, और हमारी नसों में गन्दगी जमा होने लगती है। यह कई बीमारियों का कारण होता है, केवल सभी हानिकारक आदतें (जैसे धूम्रपान, अस्वास्थ्यकर भोजन, खराब वातावरण, गतिहीन जीवन शैली) नहीं, बल्कि प्राकृतिक (लिपिड का जमा होना - एक ऐसी प्रक्रिया जो सभी जीवों में होती है)।

'गंदी' रक्त वाहिकाओं का क्या अर्थ है?
 
 जंग से भरे कुछ पाइपों की कल्पना करें. इसमें क्या होता है? पानी का दबाव बढ़ जाता है, और पानी खराब हो जाता है। यही बात रक्त वाहिकाओं के साथ भी होती है। जब उन पर कोलेस्ट्रॉल या अन्य पदार्थ जमा हो जाते हैं, तो दबाव बढ़ जाता है ( गंदी नसें उच्च रक्तचाप का मुख्य कारण हैं! ), रक्त में अशुद्धियाँ होती हैं, रक्त परिसंचरण विक्षिप्त होता है।परिणामस्वरूप, शरीर के सभी अंगों और प्रणालियों में परिवर्तन होते हैं। यहां तक कि त्वचा भी एक प्रणाली है।

मानव शरीर पुराना हो जाता है। यदि आप सावधान हैं और आप अपने रक्त वाहिकाओं को साफ करते हैं, तो आपके पास अंगों या जोड़ों में दर्द के बिना कम से कम 20 साल जीने की संभावना है, और शरीर उत्कृष्ट रूप से काम करेगा। दूसरे शब्दों में, रक्त वाहिकाओं को साफ करना आपके जीवन और स्वास्थ्य को लम्बा खींच सकता है। और यह सिर्फ एक सिद्धांत नहीं है।मैंने अपने रोगियों को इस विधि की सिफारिश की और मैं व्यक्तिगत रूप से इसका अभ्यास करता हूं। जिन लोगों ने मेरी सलाह सुनी है, वे सभी उम्र में काफी अधिक हैं।

 इस तरह से नसों में धीरे - धीरे गन्दगी जमा होती है। यदि आपने कभी अपने रक्त वाहिकाओं को साफ नहीं किया है और आप ४० वर्ष से अधिक उम्र के हैं, तो उनमें कई अशुद्धियाँ हैं।यह आपके स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है, या शायद यह प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।

'गंदे' रक्त वाहिकाओं के कारण किस तरह की विकृति हो सकती है?

जैसा कि मैंने पहले ही उल्लेख किया है, पूरा शरीर पीड़ित है। लेकिन सबसे पहले, रक्त परिसंचरण से सीधे जुड़े अंग और प्रणालियां प्रभावित होती हैं - कार्डियोवास्कुलर सिस्टम।

रक्त वाहिकाओं से अशुद्धियाँ निम्नलिखित बीमारियों का कारण बन सकती हैं :-

एथेरोस्क्लेरोसिस:-  नसें अच्छी तरह से काम करना बंद कर देती हैं: छोटी नसें पूरी तरह से बंद हो जाती हैं, और मुख्य नसों में कोलेस्ट्रॉल की उच्च मात्रा मौज़ूद होती है।

इस्केमिक हृदय रोग:- यह कोरोनरी वाहिकाओं में नियमित रक्त की कमी के कारण होता है, जो बदले में, वाहिकाओं से अशुद्धियों के कारण विकसित होता है।

आघात:- सेरेब्रल टिश्यू में रक्त की आपूर्ति में कमी तंत्रिका तंत्र के अंत का मृत्यु का कारण बनती है, जिससे कुछ कार्यों का नुकसान होता है। 

उच्च रक्तचाप:- रक्त वाहिकाओं की अशुद्धियां लुमेन के संकुचन और रक्तचाप के बढ़ने का कारण बनती हैं।

वैरिकाज वेंस:- वे केवल पैरों पर नहीं (जो महिलाओं के लिए खतरनाक है) शरीर के अंदर दिखाई देते हैं. बवासीर भी इसी का एक परिणाम है।

शिरापरक और धमनी घनास्त्रता:- रक्त वाहिकाओं में अशुद्धियों के जमा होने से थ्रोम्बी बनता है और जो मृत्यु कारकों को जन्म देता है, जिससे एक जीव में कोशिकाओं के समूह की मृत्यु हो सकती है। यदि थ्रोम्बस बन जाता है और रक्त में मिल जाता है, तो हृदय में रक्त वाहिकाओं को अवरुद्ध कर सकता है, कार्डियक अरेस्ट हो सकता है, जिसमे ७०% मामलों में रोगी की मृत्यु हो जाती है। यह स्थिति फैल रही है। हृदय संबंधी रोग अन्य कारणों की तुलना में ४ गुना अधिक मौतों के लिए जिम्मेदार हैं।  डॉक्टरों को इस बारे में पता है, वे आवश्यक रक्त वाहिकाओं की सफाई को जानते हैं, लेकिन कुछ कारणों से, भारतीय दवा इस पहलू की उपेक्षा करती है। अधिकांश डॉक्टर उच्च रक्तचाप की स्थिति में रक्तचाप को कम करने के उपाय बताते हैं। हालांकि, ये इलाज के लिए नहीं हैं, लेकिन इनका अस्थायी प्रभाव है।

रक्त वाहिकाओं को साफ करना आवश्यक है। वैसे, इस पद्धति का उपयोग अमेरिका और यूरोप में सभी लोगों द्वारा ३५-४० वर्ष से या आधी सदी से किया जा रहा है। वहां सभी रोगियों को रक्त वाहिकाओं को साफ करने की आवश्यकता के बारे में पता है। मैं हर समय अपने आप से पूछता रहा कि हमारे देश में ऐसा क्यों नहीं होता है।

क्या कोई लक्षण हैं जो हमें रक्त वाहिकाओं में जमा की उपस्थिति के बारे में एहसास कराते हैं?

- बेशक हैं। इसके मुख्य लक्षण हैं:-

आधासीसी
याददाश्त कमजोर होना
अत्यधिक थकान
अनिद्रा
सेक्स सम्बन्धी दिक्कतें
दृष्टि और श्रवण विकार
उच्च रक्त चाप
श्वास की दुर्बलता और एनजाइना पेक्टोरिस
पैरों पर त्वचा का पीला रंग
मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द
भले ही आपके पास इन लक्षणों में से एक हो या नहीं, ३० वर्ष की आयु के बाद, रक्त वाहिकाओं को ५ साल में कम से कम एक बार साफ करना आवश्यक है। इस तरह, आपका स्वास्थ्य अच्छा रहेगा।

रक्त वाहिकाओं में अशुद्धियों को इकट्ठा करने की क्षमता होती है, विशेष रूप से वृद्ध लोगों में। इसके लिए, पूरे दिन बर्गर या फ्रेंच फ्राइज़ खाना आवश्यक नहीं है। सॉसेज या तला हुआ अंडा खाने के बाद भी, कोलेस्ट्रॉल की एक निश्चित मात्रा रक्त कोशिकाओं में जमा हो जाएगी, जो समय के साथ बढ़ती है।

बुधवार, 27 मई 2020

A KIDNEY (IN URETER) STONE REMOVE IN ONLY 10 DAYS

एक पुरुष पेशेंट जिसकी उम्र 20 yrs है। वह युरेटर की पथरी(Stone) से पीड़ित था। उसके बहुत तेज दर्द था तथा पेशाब में खून(Blood) भी आ रहा था। पेशेंट की ट्रीटमेंट से पहले की रिपोर्ट निम्न है:-
फर्स्ट ट्रीटमेंट से ही लगभग 10 दिन में ही युरेटर की पथरी मुलायम होकर पेशाब के रास्ते बाहर निकल गई। जो निम्न है:-
इस ट्रीटमेंट से दर्द होना तो पहले दिन से ही बंद हो गया था।अब ये पूरी तरह से ठीक (cure) हैं।
इनका इलाज इलेक्ट्रो-होम्योपैथी की हर्बल मेडिसिन से किया गया है जो की शरीर के भीतर के सभी विषों(टॉक्सिन्स) को बाहर करके शरीर के रस(लिम्फ) और खून (ब्लड) को शुद्ध (pure) करके शरीर को नवजीवन प्रदान करती हैं। इस पद्दति की मेडिसिन हानि रहित होती हैं , इनका कोई साइड इफ़ेक्ट नही होता है। यह 100% हर्बल मेडिसिन होती है। इसके होमियोपैथी से कोई संबंध नहीं है।

Note:- आउट साइड पेशेंट्स के लिए मेडिसिन कूरियर से भेज दी जाती है

DR.ASHOK KUMAR
MOB- 8178513616(WHATSAPP),
           9716126839

शुक्रवार, 27 मार्च 2020

कोरोना एप के द्वारा पता लग सकेगा कोरोना का ।

CoronaVirus के खिलाफ भारत समेत पूरी दुनिया जंग लड़ रही है। इस बीच, इस महामारी से बचने के उपायों को लेकर भी जद्दोजहद जारी है।
भारत में कई स्तर पर प्रयोग हो रहे हैं। ताजा खबर हरियाणा के फरीदाहाद से है। यहां के जेसी बोस विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, वाईएमसीए, के छात्रों ने ऐसा ऐप बनाने का दावा किया जो कोरोना वायरस संक्रमित के पास आने पर अलर्ट कर देता है। इतना ही नहीं, यह ऐप यह भी बताता है कि किन-किन स्थानों पर कोरोना संक्रमण का खतरा है और यूजर को वहां जाने से बचना चाहिए।

जियो-फेंसिंग तकनीक का उपयोग

जेसी बोस विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की स्टार्ट-अप टीम में एमबीए के दो छात्रों ललित फौजदार तथा नितिन शर्मा ने जियो-फेंसिंग तकनीक का उपयोग करते हुए यह मोबाइल ऐप तैयार किया है।यदि कोरोना वायरस संक्रमित कोई व्यक्ति इस ऐप के 5 से 100 मीटर के दायरे में आता है तो यह अलर्ट मैसेज भेज देता है।

नाम दिया कवच, जानिए बनने के पीछे की कहानी

विश्वविद्यालय के एडजेंक्ट फैकल्टी अजय शर्मा के मुताबिक, इस ऐप को कवच नाम दिया गया है। ऐप अजय शर्मा की देखरेख में ही बना है। उनके मुताबिक, केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने 16 मार्च को कोविड-19 सोल्यूशन चैलेंज लॉच किया था और 31 मार्च तक CoronaVirus से बचाव के लिए इनोवेटिव समाधान बुलाए थे। इसी चैलेंज के तहत छात्रों ने काम किया और 10 दिन की अथक मेहनत के बाद ऐप तैयार कर लिया।

कब कर सकेंगे डाउनलोड

अजय शर्मा के मुताबिक, ऐप को तैयार कर इसका प्रोटोटाइप भारत सरकार के पास भेजा गया है। साथ ही ऐप को प्ले स्टोर पर उपलब्ध करवाने के लिए गूगल इंडिया को भी भेजा जा चुका है। केंद्र सरकार से अनुमति मिलने के बाद हर कोई इसे डाउनलोड कर सकेगा और CoronaVirus जैसी महामारी से बच सकेगा।

शनिवार, 21 मार्च 2020

थर्मल स्कैनर (Thermal Scanner)


कोरोना वायरस की वजह से पूरी दुनिया में हड़कंप मचा हुआ है। चीन के वुहान शहर से फैला यह वायरस लगभग पूरी दुनिया में अपने पैर पसार चुका है।  हमारे देश के विभिन्न स्थानों पर थर्मल स्क्रीनिंग की जा रही है, ताकि कोरोना वायरस से संक्रमित शख्स की पहचान की जा सके। ऐसे में हम आपको बताते हैं कि आखिर क्या है थर्मल स्क्रीनिंग और इससे कोरोना वायरस की पहचना कैसे होती है। थर्मल स्कैनर की कीमत 3 हजार रुपये से लेकर 50 हजार रुपये तक है। आप इसे घर बैठे ऑर्डर करके मंगवा सकते हैं।

क्या है थर्मल स्कैनर या थर्मल गन?

कोरोना वायरस से जंग में इस समय थर्मल स्कैनर महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। थर्मल स्कैनर (थर्मल गन) ऐसा उपकरण है, जिसके जरिए कोरोना वायरस या फिर किसी और रोग से ग्रसित व्यक्ति की पहचान की जा सकती है। एक्सपर्ट के मुताबिक थर्मल स्कैनर एक हेल्दी व्यक्ति और विषाणु से ग्रस्त व्यक्तियों में अंतर बताता है। इस स्कैनर की खासियत यह है कि इससे निकलने वाली तरंगों का मानव शरीर पर कोई बुरा असर या नुकसान नहीं होता। लेकिन, इसका इस्तेमाल विशेषज्ञ की देखरख में ही करनी चाहिए।

थर्मल स्कैनर से मरीजों की पहचान कैसे?

थर्मल स्कैनिंग को लेकर लोगों के मन में डर रहता है इससे शरीर को कोई नुकसान हो। लेकिन, आपको बता दें कि थर्मल स्कैनिंग हमारे शरीर की जांच के सबसे आसान उपायों में से एक है और इससे किसी के शरीर में कोई नुकसान नहीं पहुंचता। इस चेकिंग के दौरान यदि थर्मल स्कैनर से गुजरने वाले किसी व्यक्ति के शरीर का तापमान सामान्यत व्यक्ति के तापमान से अधिक पाया जाता है, तो ऐसे संदिग्ध की मेडिकल जांच की जाती है।

 थर्मल स्कैनर (थर्मल गन) एक इंफ्रारेड कैमरे की तरह काम करता है। इस स्कैनर के जरिए गुजरने वाले व्यक्ति के शरीर में मौजूद विषाणु इंफ्रारेड तस्वीरों में दिखाई पड़ते हैं, विषाणुओं की संख्या अधिक या खतरनाक स्तर पर होने पर व्यक्ति के शरीर का तापमान भी बढ़ जाता है। लिहाज, इससे पता चल जाता है कि व्यक्ति किसी संक्रमण से ग्रसित है और आसानी से उसकी पहचान हो जाती है।

क्या असर होता है?

थर्मल गन की खासियत यह है कि इससे निकलने वाली तरंगों का कोई साइड इफेक्ट नहीं होता है। थर्मल गन को सिर के पास ले जाकर तापमान मापा जाता है। जिससे स्वस्थ व्यक्ति और संदिग्ध रोगी के बीच तापमान के अंतर से पता चलता है। यह स्कैनर व्यक्ति के शरीर के तापमान के आधार पर संदिग्ध रोगी का पता लगाता है। एक्सपर्ट का कहना है कि एक सामान्य स्वस्थ व्यक्ति के मुकाबले कोरोना पीड़ित के शरीर का तापमान अधिक होगा। प्राथमिकी तौर पर इस यंत्र से पुष्टि होने के बाद संदिग्ध मरीज को मेडिकल जांच के लिए भेजा जाता है।

ऑनलाइन मंगवाएं थर्मल गन
तमाम ई-कॉमर्स वेबसाइट पर थर्मल गन (Thermometer Gun) उपलब्ध हैं, जिसकी शुरुआती कीमत 3 हजार रुपये से लेकर 50 हजार रुपये तक है। आप इसे घर बैठे ऑर्डर करके मंगवा सकते हैं। हालांकि कहा जा रहा है कि स्क्रीनिंग के दौरान की एक्सपर्ट की मदद जरूरी है।

कोरोना वायरस (Corona virus)के लक्षणों को समझें

इस वायरस के प्राथमिक लक्षण क्या हैं यह भी अब तो सभी पता चल गए होंगे |


एहतियात के तौर पर कोरोना वायरस के यह हैं लक्षण जिसे देखे और समझे।

1 -3 दिन

कोरोना वायरस के प्राथमिक पहले 1 -3 दिनों तक मामूली बुखार चढ़ना मामूली सा गले में दर्द होना यह लक्षण दिखाई देते है |

चौथा दिन

चौथे दिन से गले में दर्द महसूस होना ,व्यक्ति की आवाज बदल जाना ,शरीर का अचानक तापमान बढ़ जाना ,सिरदर्द बढ़ जाना इत्यादि लक्षण नजर आ जाते हैं |

पांचवा दिन

पहले 4 दिनों के लक्षण के बाद पांचवे दिन शरीर को थकान हो जाती है ,सर दर्द ,खाँसी बरक़रार रह जाती हैं |

छठा दिन

इस दिन बुखार 37 सेल्सियस तक बढ़ जाता हैं , जोरदार खांसी ,सांस लेने में तकलीफ और उल्टियाँ शुरू होना यह लक्षण नजर आ जाते हैं |

सातवा दिन

सातवे दिन भी तेज बुखार ,खाँसी और थूँकना बढ़ जाना ,शरीर दर्द, उल्टिया और जुलाब यह लक्षण दिखाई देते हैं |

8 -9 दिन

इन दिनों में तेज बुखार 37 -38 सेल्सियस तक ,असहनीय खाँसी और सांस लेने में कठिनाई हो जाती हैं |
इस स्थिति में अपने डॉक्टर की सलाह ले साथ ही ब्लड टेस्ट और x -ray कराकर जांच कर ले की आप covid -19 से ग्रस्त तो नहीं हैं |

शनिवार, 14 मार्च 2020

THYROID (Hypothyroidism) CURE IN 38 DAYS

एक महिला पेशेंट जिनकी उम्र लगभग 55-57 वर्ष है इनकी थाइरोइड (हाइपो थाइरोइड)का ट्रीटमेंट 13/06/2019 को प्रारम्भ किया था जिसमे इनकी रिपोर्ट में TSH का लेवल 13.3 था। इनकी फर्स्ट रिपोट निम्न प्रकार है:-

शुक्रवार, 17 जनवरी 2020

A Kidney(in Ureter) stone 17.5 MM Size Removed in 15 days successfully

एक महिला पेशेंट जिसकी उम्र 25 yrs है। वह युरेटर की पथरी(Stone) से पीड़ित थी। उसके बहुत तेज दर्द था तथा पेशाब में खून(Blood) भी आ रहा था। पेशेंट की ट्रीटमेंट से पहले की रिपोर्ट निम्न है:-


फर्स्ट ट्रीटमेंट से ही लगभग 15 दिन में ही युरेटर की पथरी मुलायम होकर पेशाब के रास्ते बाहर निकल गई। जो निम्न है:-

 
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