गुरुवार, 28 जून 2012

कंप्यूटर से आंखोँ का बचाव

आज के हाईटेक जमाने मेँ कंप्यूटर के बिना काम करने की कल्पना भी नहीँ की जा सकती है। जब हर रोज सात-आठ घंटे कंप्यूटर पर काम करना हो तो आंखोँ पर इसका प्रभाव तो पड़ता ही है। कंप्यूटर से होने वाली इन तकलीफोँ को कंप्यूटर विजन सिँड्रोम का नाम दिया गया है। समय रहते इसके लक्षणोँ को समझकर बचाव के लिए उपाय भी किये जा सकते हैँ।

कंप्यूटर विजन सिंड्रोम के लक्षण

1. आंख और सिर मेँ भारीपन।
2. धुंधला दिखना।
3. आंख मेँ जलन या खुजली।
4. आंखोँ का सूखा रहना।
5. पास का देखने मेँ दिक्कत।
6. रंगोँ को पहचानने मेँ मुश्किल।
7. आंखोँ के अलावा गर्दन, कमर और कंधोँ मेँ दर्द होना।
ये सभी कंप्यूटर विजन के लक्षण हैँ।

आंखोँ मेँ तकलीफ के डर से कंप्यूटर को तो नहीँ छोड़ा जा सकता है, क्योँ ना कुछ बुरी आदतोँ को छोड़ दिया जाए और फायदे वाले टिप्स आजमा लेँ।

इन उपायोँ से बचायेँ आंखेँ

1. कंप्यूटर पर काम करते समय आंख की पलकोँ को थोड़ी-थोड़ी देर बाद झपकाते रहना चाहिए। सामान्य अवस्था मेँ व्यक्ति एक मिनट मेँ 20 से 22 बार पलकोँ को झपकाता है। कंप्यूटर पर काम करते समय लोग एक मिनट मेँ सिर्फ 7 से 8 बार ही पलकोँ को झपका पातेँ हैँ। पलकोँ को जल्दी-जल्दी झपकाने से पलकेँ आंख की पुतली (कोर्निया और कन्जंक्टाइवा) के ऊपर आंसू फैलाने का काम करती हैँ और आंख को सूखा होने से बचाती हैँ।

2. कंप्यूटर पर काम करते समय कंप्यूटर वाले चश्मेँ का इस्तेमाल करेँ तो ज्यादा बेहतर होगा। इस तरह के चश्मेँ मेँ ट्राइपोकल लेंस और प्रोगेसिव लेँस के मुकाबले बीच के देखनेँ का क्षेत्र बड़ा होता है।

3. कंप्यूटर खिड़की के सामने नहीँ होना चाहिए। स्क्रीन की रोशनी और कमरे की रोशनी की मात्रा बराबर होनी चाहिए।

4. कंप्यूटर स्क्रीन आंख के स्तर से 15 डिग्री नीचे की तरफ होनी चाहिए। स्क्रीन और आंख के बीच लगभग 25 इंच की दूरी होनी चाहिए।
5. कंप्यूटर पर काम करते समय हर आधा घंटे बाद 15-20 सेकैँड के लिए किसी दूर की वस्तु को देखना चाहिए। अच्छा होगा कि हर घंटे एक छोटा ब्रेक लिया जाए।

6. दूध, हरी सब्जी, मौसमी फलोँ का प्रचूर मात्रा मेँ सेवन भी बचाव का एक उपाय है।

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